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पोवारी स्वाभिमान

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 पोवारी स्वाभिमान🙏 निज पहचान परा गर्व से स्वाभिमान, निज सम्मान की रक्षा से स्वाभिमान। पहचान लक़ नहाजन हमी अनजान,  काय लाई सोडबीन आपरी पहचान। गर्व से हमला आपरो पुरखा इन पर, कसो मुरायबीन येला  नवो नाव धर। सुवारथ को कारन  कसो बिके आन, नही मिट सिकसे आपरो स्वाभिमान। आपरी विरासत से  पोवारी अस्मिता, पूजनीय से या जसो माता अन् पिता। त्याग बलिदान की कृति स्वाभिमान, कसो सोडबी हमरो समाज को मान। जागो जागो ऊभो होनकी आई बेरा, नाव मिटान वारो ला नोको देव डेरा। आमरो पुरखा इनको नाव से धरोहर, जगानो से पोवारी स्वाभिमान घर घर। 🔆🙏🔆🙏🔆🙏🔆🙏🔆 ✍🏻ऋषि बिसेन

पोवार(३६ कुर पंवार) समाज मा बिहया का रीति-रिवाज अना नियम

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  पोवार(३६ कुर पंवार) समाज मा बिहया का रीति-रिवाज अना नियम   १). हमारो समाज मा पुरातन् काल मा छत्तीस कुर होता पर वैनगंगा क्षेत्र मा एकतीस कुर की बसाहट भई अना आता इनको बीचमा को पारिवारिक संबद्ध मा होनेवाला बिहया सजातीय बिहया ला समाज मा मान्यता देसेती। २). आमरो क्षत्रिय कुर पोवार (छत्तीस कुर पंवार) समाज मा विवाह योग्य कुर/कुल १. अम्बुले (अमुले) , २. बघेले (बघेल) , ३. भगत (भक्तवर्ती ) ,   ४. भैरम ,   ५. भोएर , ६. बिसेन ,   ७. बोपचे , ८.चौहान , ९.चौधरी , १०. डाला , ११. तुरकर , १२. गौतम , १३. हनवत , १४. हरिनखेड़े , १५. जैतवार , १६. कटरे १७. कोल्हे , १८. क्षीरसागर , १९. पटले २०. परिहार , २१. पारधी , २२. पुण्ड , २३. राहंगडाले , २४. येड़े , २५. रिनायत , २६. राणा (राणे) २७. शरणागत , २८. सहारे , २९. सोनवाने , ३०. ठाकरे (ठाकुर) , ३१. टेम्भरे। रावत , फरीदाले , रणमत , रनदीवा अना राजहंस कुल ला मिलायकन पोवार समाज का ३६ कुर/कुल होन का इतिहास मा उल्लेख से पर आपरो क्षेत्रमा ये कुल प्रायः लुप्त भय गया सेती। ३). समान कुल मा बिया मान्य नहाय अना यव घोर पाप की श्रेणी मा...

पोवार(36 कुरी पंवार) समाज का मध्यभारत/वैनगंगा क्षेत्र में आकर बसने का इतिहास

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        पोवार(36 कुरी पंवार) समाज का मध्यभारत/वैनगंगा क्षेत्र में आकर बसने का इतिहास आओ बचाये अपनी संस्कृति और गौरवशाली इतिहास को, और दे सच्ची श्रद्धांजलि अपने पूर्वजों को सन् 1700 क़े आसपास हमारे पुरखों ने नगरधन(रामटेक क़े समीप) और वैनगंगा क्षेत्र में आकर, 36 क्षत्रिय कुलों क़े रूप में संगठित होकर नये युग की शुरुवात की। ********************** राजा भोज धर्मपरायण राजा थे और उनके शासन का आधार सनातनी धर्म था। उनके युद्ध भी धर्मयुद्ध होते थे और उनकी कोई स्थायी सेना न होकर, धर्म के लिए लड़ने वाले योद्धाओं का समूह था। यही वजह थी की उनकी, हर युद्ध में विजय होती थी। लेकिन चौदहवी सदी के शुरुवात में मालवा पर मुस्लिमों के आधिपत्य के बाद उनके वंशजों और सहयोगियों को कठिन वक्त से गुजरना पढ़ा। मालवा पर मुस्लिमों के आधिपत्य के बाद उनके वंशजों और नातेदारों ने सैन्य समूह के रूप में दुश्मनों के विरूद्ध संघर्षों में अनेक राजाओं का सहयोग किया। कूछ अन्य दूसरे क्षेत्रों में जाकर भी बस गये। उनका एक बड़ा सैन्य जत्था अठारवी सदी में देवगढ़ राजा के अनुरोध पर नगरधन(रामटेक के पास) आया था जो बाद में...

माय वैनगंगा अना पंवार(पोवार) समाज

 माय वैनगंगा अना पंवार(पोवार) समाज 🙏🙏🙏         पुण्य सलिला माय वैनगंगा का महत्व पुराणमा मिल जासे। एक पौराणिक कथा को अनुसार भंडाक देश का धर्मात्मा राजा बैन, सदा गंगाजी माँ स्न्नान लाई जात होता। अदिक उमर होन को कारन उनला आता गंगा जी जान मा तकलीफ होवन लगी। येक रोज गंगा स्नान को बाद उनना माय गंगा लक़ आव्हान करीन की मोला असो वरदान देय की मी सदा को जसो बुढ़ापा मा बी स्नान लाई पंहुच सकू। माय गंगा प्रकट भई अन उनला यव समाधान सांगिस की तुम्ही गंगा का जल आपरो कमंडल मा लेयकन जाओ अन जेन जागा परा तुम्ही यन जल ला प्रवाहित करहो उत कनलक मि आपरो एक रूपमा प्रकट होय जाऊ।              राजा कमंडल मा गंगा को जलला धरकन वापिस भयो। वापसी मा सिवनी जवर मुंडारा नाम को गावमा राजा आराम करनला बस्यो होतो। उतच उनको हाथ लक कमंडल पड़ गयो अना वहांच लक गंगाजी की धरा बोहान लगी। राजन लगतच दुखी भयो अन गंगाजी ला अखिन सुमरन लग्यो। माय गंगा मुंडारा मा प्रकट भई अन उनना राजा ला कहीन की तुम्ही मोरो सच्चा भगत आव अन तुम्ही निराश नोको होव। सिवनी मा गुप्त रूप मा भगवान शिव को वा...

स्व. जयपाल सिंह पटले : पोवारी साहित्य का पितामह

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 स्व. जयपाल सिंह पटले : पोवारी साहित्य का पितामह 💐💐🙏💐💐🙏💐💐🙏💐💐                 पोवारी साहित्य का पितामह स्व. श्री जयपाल सिंह जी पटले को जनम बालाघाट ज़िला की वारासिवनी तहसील का सालेटेका गाव मा दिनांक १७/०७/१९३५ मा भयो होतो। ओनकी प्रारम्भिक पढ़ाई लिखाई बालाघाट ज़िला मा भयी।बरस १९५६ मा उनना बिलासपुर लक़ इलेक्ट्रिशियन मा आई टी आई का प्रशिक्षन लेयकन महाराष्ट्र विद्युत् मण्डल मा १९९३ वरी नौकरी करीन।               उनको हिरदयमा पोवार समाज को प्रति लगत पिरम होतो। पोवार(पंवार) समाज की मातृभाषा पोवारी भाषा को संरक्षन् अन संवर्धन लाई उनना, "मायबोली पोवारी बचाओ" अभियान की शुरुवात करकन विलुप्त होन की कगार परा उभी यन भाषा ला नवजीवन देनको भगीरथ काम करीन।                पंवार समाज की प्रतिष्ठित वार्षिक पत्रिका, "पंवार भारती" का सन २००१ को अंक मा ओनको येक लेख प्रकाशित भयो होतो। यन लेख मा उनना पोवारी बोली का जतन लाई समाजलक़ आह्वान करी होतिन। यन लेखमा स्व. पटले जी को द्वारा रचित ...

क्षत्रिय पोवार(पंवार) समाज

                                                                                                          क्षत्रिय पोवार(पंवार) समाज मालवा राजपुताना के मूलनिवासी पंवार(पोवार) अठारहवी सदी की शुरुवात में, देवगढ़ राजा के द्वारा मुगलों के विरूद्ध संघर्ष हेतु आह्वान पर धारानगरी से नगरधन(रामटेक के पास) आये और अपनी वीरता से इस क्षेत्र मुगलों के विरुद्ध देवगढ़ राजा को विजय दिलाई। देवगढ़ के राजा ने मालवा के इन पंवारों को जागीर, किले और कृषि भूमि प्रदान की। इस समय पंवार अपने परिवार के साथ नगरधन और नागपुर सहित भंडारा जिले में आकर बस गये। मराठा शासन के समय भी पोवारों की राजकरण और सैन्य क्षेत्र में बड़ी भूमिका थी। कटक सहित कई अभियानों में इन्होंने मराठाओं का साथ दिया और जीत दर्ज की। इसी विजय के कारण पोवारों को वैन...

स्व. भोलाराम जी पारधी

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  स्व. भोलाराम जी पारधी स्व. भोलाराम जी पारधी, पूर्व सांसद और पंवार समाज से बालाघाट जिले से युगपुरुष जिन्हें समय के साथ धीरे धीरे सब भूल रहें थे, अब उनकी स्मृति में सभागार का नाम रखना एक छोटा सराहनीय कदम होगा। हालांकि उनके नाम पर ओवरब्रिज, चौराहे, रोड के नाम होने चाहिए पर ऐसा नही हुआ हैं। पोवार समाज के इस युगपुरुष को हमेशा याद रखना होगा और आने वाली पीढ़ीयों को उनसे प्रेरणा मिलते रहेगी। पंवार संदेश माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा पारधी परिवार का सम्मान आदरणीय स्वर्गीय भोलाराम पारधी पूर्व सांसद बालाघाट पंवार समाज के गौरव जिन्होंने लगभग 60 वर्ष पूर्व बालाघाट मंडी का उद्घाटन किए थे, उनकी स्मृति में मंडी के नए सभागार का नाम भोलाराम पारधी सभागार रख कर एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।