माय वैनगंगा अना पंवार(पोवार) समाज


 माय वैनगंगा अना पंवार(पोवार) समाज 🙏🙏🙏

        पुण्य सलिला माय वैनगंगा का महत्व पुराणमा मिल जासे। एक पौराणिक कथा को अनुसार भंडाक देश का धर्मात्मा राजा बैन, सदा गंगाजी माँ स्न्नान लाई जात होता। अदिक उमर होन को कारन उनला आता गंगा जी जान मा तकलीफ होवन लगी। येक रोज गंगा स्नान को बाद उनना माय गंगा लक़ आव्हान करीन की मोला असो वरदान देय की मी सदा को जसो बुढ़ापा मा बी स्नान लाई पंहुच सकू। माय गंगा प्रकट भई अन उनला यव समाधान सांगिस की तुम्ही गंगा का जल आपरो कमंडल मा लेयकन जाओ अन जेन जागा परा तुम्ही यन जल ला प्रवाहित करहो उत कनलक मि आपरो एक रूपमा प्रकट होय जाऊ। 

            राजा कमंडल मा गंगा को जलला धरकन वापिस भयो। वापसी मा सिवनी जवर मुंडारा नाम को गावमा राजा आराम करनला बस्यो होतो। उतच उनको हाथ लक कमंडल पड़ गयो अना वहांच लक गंगाजी की धरा बोहान लगी। राजन लगतच दुखी भयो अन गंगाजी ला अखिन सुमरन लग्यो। माय गंगा मुंडारा मा प्रकट भई अन उनना राजा ला कहीन की तुम्ही मोरो सच्चा भगत आव अन तुम्ही निराश नोको होव। सिवनी मा गुप्त रूप मा भगवान शिव को वास् आय अन मी शिवजी की परिक्रमा को बाद तुम्हारो देश की राजधानी भंडारा मा आय जांहू। माय वैनगंगा उद्गम स्थल मुंडारा लक सिवनी क्षेत्र का लखनवाड़ा, मुंगवानी, दिघोरी, छपारा होवता हुए माय बालाघाट, गोंदिया  लक भंडारा पंहुच गयी। राजा को नाव लक़ यन गंगा का रूप को नाव वैनगंगा भयो।६४१ किलोमीटर को सफर तय करकन वैनगंगा दक्षिण की गंगा गोदावरी मा मिलकन बंगाल की खाड़ी में भागीरथ गंगा को साथ सागर मा  मिल जासे। येक दूसरी प्रचलित कथा मा वैनगंगा आदिवासी युवक युवती वनी और गंगा के पवित्र प्रेम का परिचायक भी माना जासे।

            मालवा राजपुताना लत आया पोवार समाज, नगरधन लक होवता हुआ वैनगंगा क्षेत्र मा बसीन। माय को आंचलमा का चार जिल्हा सिवनी, बालाघाट, गोंदिया अन भंडारा मा पंवार समाज का तीस कुर की स्थायी बसाहट भई। महाकाल महादेव को भक्त, पंवार समाज की माय वैनगंगा को क्षेत्र मा खुप तरक्की भई अन आपरो मूलनिवास लक एतरो दूर आनको बाद बी समाज न आपरो पुरातन गौरव को अनुरूप इतन बी खुप नाम रोशन करया। माय वैनगंगा को नाव पर हमारो समाज की वैनगंगा क्षेत्र का पंवार नाव लक़ भी येक पहिचान भेटि से।

✍🏻ऋषि बिसेन, बालाघाट

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