स्व. जयपाल सिंह पटले : पोवारी साहित्य का पितामह
स्व. जयपाल सिंह पटले : पोवारी साहित्य का पितामह
💐💐🙏💐💐🙏💐💐🙏💐💐
पोवारी साहित्य का पितामह स्व. श्री जयपाल सिंह जी पटले को जनम बालाघाट ज़िला की वारासिवनी तहसील का सालेटेका गाव मा दिनांक १७/०७/१९३५ मा भयो होतो। ओनकी प्रारम्भिक पढ़ाई लिखाई बालाघाट ज़िला मा भयी।बरस १९५६ मा उनना बिलासपुर लक़ इलेक्ट्रिशियन मा आई टी आई का प्रशिक्षन लेयकन महाराष्ट्र विद्युत् मण्डल मा १९९३ वरी नौकरी करीन।
उनको हिरदयमा पोवार समाज को प्रति लगत पिरम होतो। पोवार(पंवार) समाज की मातृभाषा पोवारी भाषा को संरक्षन् अन संवर्धन लाई उनना, "मायबोली पोवारी बचाओ" अभियान की शुरुवात करकन विलुप्त होन की कगार परा उभी यन भाषा ला नवजीवन देनको भगीरथ काम करीन।
पंवार समाज की प्रतिष्ठित वार्षिक पत्रिका, "पंवार भारती" का सन २००१ को अंक मा ओनको येक लेख प्रकाशित भयो होतो। यन लेख मा उनना पोवारी बोली का जतन लाई समाजलक़ आह्वान करी होतिन। यन लेखमा स्व. पटले जी को द्वारा रचित पोवारी मा चंद लाइन होती-
पोवारी बोली की पुकार
आपलोच घर मा मी भई गई पराई गा।
नाहनांग रव्हन की मोरो पर पारी आ गई गा ।।
आपलोच घर मा (1)
बुढ़गी माताराम मोला मान लक बोल सेत।
जवान माय-बहिन कधी-कधीच बोल सेत ।।
जवान बेटा-बेटी मोरी हासीच उड़ावसेत ।
शरम लका मी होय जासू लाल-पीवरीगा ।। अपलोच घर मा..
मोठागन आवन की जब मी सोचू सू ।
भाउ ना दादाजी ला देखकन डरासू ।।
मोठांगन माहारा -मेन्द्रा की गोष्ठी आयकखेन ।।
डर को मार्या मी होय जासू घामघयानी गा। अपलोच घर मा...
मोरा आपराच मोला डरावन लग्या सेती।
आपलाच मोरोलक दुहुर परान लग्या सेती ।।
हिन्दी अना मराठी मा सब बोलन लाग्या सेती...
२००१ मा प्रकाशित यव कविता मा आपरी मातृभाषा की स्थिति दिस रही से की कसो आता पोवारी बोलन वाला कम होय रही सेती। येको बाद स्व. जयपाल सिंह ज़ी ना पोवारी भाषा बचावन लाई आपरो बच्यो जीवनला अर्पन कर देईन। उनना पोवारी भाषा मा छःह महाग्रन्थ की रचना करीसेती अना सातवो ग्रन्थ का प्रकाशन ओनकी बेटी को द्वारा जल्दी होय रही से।
स्व. जयपाल जी की पोवारी भाषा मा पहिली किताब, २००६ मा "पंवार गाथा" प्रकाशित भयी। ओनकी राष्ट्रसंत तुकढ़ोजी महाराज को प्रति अथाह आस्था होती अना स्व. पटले जी न ओनको महाग्रन्थ, "ग्राम गीता" का पोवारी संस्करण २००९ मा प्रकाशित करीन। तसच आदरणीय जयपालसिंह ज़ी न सनातनी हिन्दू धरम को प्रचार-प्रसार आपरो साहित्य को माध्यम लक़ खुप करीसेती । उनना सन २०१२ मा गोस्वामी तुलसीदास ज़ी द्वारा रचित, रामचरित मानस परा आधारित पोवारी संस्करण, "गीत रामायण" महाग्रन्थ की रचना करीन। तसच २०१४ मा उनना "श्रीमद भगवतगीता सार" का पोवारी संस्करण लिखकन, समाज ला समर्पित करीन।
स्व. जयपाल सिंह जी द्वारा कविता संग्रह, सन २०१० मा "पोवारी गीत गंगा" को अना सन २०१५ मा "राजा भोज गीतांजली" को प्रकाशन भयो। ओनकी कई रचना को प्रकाशन पत्र-पत्रिका इनमा भयो होतो। जीवन का आखिर बेरा वरी ओनकी कलम कबीच नही रुकी। उनकी प्रेरणा लक़ २०१८ मा पोवारी साहित्य मण्डल की स्थापना भयी। तसच पोवारी बोली को प्रति जन जन ला जाग्रत कर युवा वर्ग ला प्रोत्साहन देन लाई श्री सी पटले ज़ी, इतिहासकार द्वारा "पोवारी भाषाविद क्रांति" की शुरुवात भयी। २०२० मा "पोवार इतिहास, साहित्य अना उत्कर्ष समूह" को द्वारा "राष्ट्रीय पोवारी साहित्य अना सामाजिक उत्कर्ष संस्था" को गठन भयो। राष्ट्रीय पोवारी साहित्य अना सामाजिक उत्कर्ष संस्था द्वारा प्रकाशित पत्रिका, "पोवारी उत्कर्ष" का विमोचन स्व. जयपाल सिंह जी पटले जी को हाथ लक़ होन को सौभाग्य भेटयों होतो। "पोवारी उत्कर्ष" पत्रिका, असी प्रथम पत्रिका होती जो पूर्ण रूप लक पोवारी भाषा मा छत्तीस कुर पोवार समाज की संस्कृति अना समाजोत्थान लाई समर्पित होती। अखिल भारतीय क्षत्रिय पंवार/पोवार की अधिकृत संस्था पोवारी साहित्य अना सांस्कृतिक उत्कर्ष को द्वारा समाज का आराध्य महाराजा भोज का जनमदिवस को अवसर परा प्रथम "राष्ट्रीय पोवारी साहित्य सम्मलेन" का हर बरस आयोजन करन की शुरुवात भयी । स्व. जयपाल सिंह ज़ी को द्वारा पहिलो राष्ट्रीय पोवारी साहित्य सम्मलेन का उद्घाटन कर यन कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाइन।
स्व. जयपाल सिंह जी समाज का कई संगठना इनको संग भी जुड़ी होतिन। उनना पंवार युवक संगठन, नागपुर मा संगठन सचिव(१९८५-९६) अना महासचिव(१९९६-९९) को पद परा रहकन समाज सेवा का काम करिसेत्। अखिल भारतीय क्षत्रिय पंवार महासभा मा वय १९९५ लक़ १९९९ वरी सहसचिव को पद परा रहकन समाज का कार्य करीन। पोवार समाज का कार्य को अलावा स्व. पटले ज़ी ना सर्वसमाज कल्याण का बी करीसेन। १९८३ लक़ १९९३ वरी तांत्रिक कामगार संघ मा महासचिव बी रहीन।
उनको द्वारा पोवारी साहित्य मा दियो अभूतपूर्व योगदान को कारन उनला "पोवारी साहित्य का पितामह" कवहनो ही ज़ियादा सही रहें। पोवारी भाषा मा उनको साहित्य ना यन भाषा की समृद्धि अना विकास मा मील का पत्थर साबित भयी से।
अज़ समाज कई साहित्यकार पोवारी भाषा मा अनेक विधा मा साहित्य सृजन का काम कर रही सेती। अखिल भारतीय क्षत्रिय पोवार/पंवार महासंघ की साहित्यिक शाखा, पोवारी साहित्य अना सांस्कृतिक उत्कर्ष आदरणीय स्व. जयपाल जी पटले को पोवारी उत्थान का स्वप्न ला पूरा करनलाई पुरो मनोयोग लक़ जुटी से। तसच समाज का कई संगठना अना समूह अज़ पोवारी भाषा ला बचावन लाई जुटी सेती।
स्व. जयपाल सिंह ज़ी ना सेवानिवृत्ती को उपरांत पुरो जीवन जीवन पोवार समाज अना पोवारी भाषा का उत्थान अर्पित कर देईन। नागपुर मा उनको निवास स्थान पोवारी साधना का मंदिर होतो। इतकन लक़ उनना कबी पैदल त् कबी सायकिल को सफर करकन मध्यभारत मा पोवार समाज मा आपरी भाषा अना संस्कृति को प्रति पिरम अना मान जगावान का काम करीन। स्व. जयपाल सिंह पटले ज़ी ना आपरी कलम ला पोवारी संस्कृति अना भाषा का उत्थान लाई खुप चलाइन अना येतरा महाग्रन्थ की रचना कर पोवारी साहित्य ला नवो शिखर पर लेय गयीन।
पोवारी को संग हिंदी अना मराठी मा बी उनना लेखन का कार्य करी होतिन। उनको जीवन सादगी का मूरत होतो। सादगी का जीवन अना उच्च बिचार को संग समाज का सांस्कृतिक अना सामाजिक उत्थान, यव प्रेरणा सबको लाई युगो युगो तक अविरत रहे, असो बिस्वास से।
माय सरस्वती को पुत्र अना पोवारी भाषा का पितामह जयपाल सिंह ज़ी ना दिनांक ०४/०८/२०२१ ला यन दुनिया ला अलविदा कहकन स्वर्गलोक मा गमन करीन। आम्ही आपरी मायबोली पोवारी अना समाज की संस्कृति ला सब मिलकन संरक्षित अना संवर्धित करबीन तब यव उनको प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होये।
✍️ऋषि बिसेन, बालाघाट
🌸🌸🚩🌸🌸🚩🌸🌸

Comments
Post a Comment