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माय वैनगंगा अना पंवार(पोवार) समाज

 माय वैनगंगा अना पंवार(पोवार) समाज 🙏🙏🙏         पुण्य सलिला माय वैनगंगा का महत्व पुराणमा मिल जासे। एक पौराणिक कथा को अनुसार भंडाक देश का धर्मात्मा राजा बैन, सदा गंगाजी माँ स्न्नान लाई जात होता। अदिक उमर होन को कारन उनला आता गंगा जी जान मा तकलीफ होवन लगी। येक रोज गंगा स्नान को बाद उनना माय गंगा लक़ आव्हान करीन की मोला असो वरदान देय की मी सदा को जसो बुढ़ापा मा बी स्नान लाई पंहुच सकू। माय गंगा प्रकट भई अन उनला यव समाधान सांगिस की तुम्ही गंगा का जल आपरो कमंडल मा लेयकन जाओ अन जेन जागा परा तुम्ही यन जल ला प्रवाहित करहो उत कनलक मि आपरो एक रूपमा प्रकट होय जाऊ।              राजा कमंडल मा गंगा को जलला धरकन वापिस भयो। वापसी मा सिवनी जवर मुंडारा नाम को गावमा राजा आराम करनला बस्यो होतो। उतच उनको हाथ लक कमंडल पड़ गयो अना वहांच लक गंगाजी की धरा बोहान लगी। राजन लगतच दुखी भयो अन गंगाजी ला अखिन सुमरन लग्यो। माय गंगा मुंडारा मा प्रकट भई अन उनना राजा ला कहीन की तुम्ही मोरो सच्चा भगत आव अन तुम्ही निराश नोको होव। सिवनी मा गुप्त रूप मा भगवान शिव को वा...

स्व. जयपाल सिंह पटले : पोवारी साहित्य का पितामह

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 स्व. जयपाल सिंह पटले : पोवारी साहित्य का पितामह 💐💐🙏💐💐🙏💐💐🙏💐💐                 पोवारी साहित्य का पितामह स्व. श्री जयपाल सिंह जी पटले को जनम बालाघाट ज़िला की वारासिवनी तहसील का सालेटेका गाव मा दिनांक १७/०७/१९३५ मा भयो होतो। ओनकी प्रारम्भिक पढ़ाई लिखाई बालाघाट ज़िला मा भयी।बरस १९५६ मा उनना बिलासपुर लक़ इलेक्ट्रिशियन मा आई टी आई का प्रशिक्षन लेयकन महाराष्ट्र विद्युत् मण्डल मा १९९३ वरी नौकरी करीन।               उनको हिरदयमा पोवार समाज को प्रति लगत पिरम होतो। पोवार(पंवार) समाज की मातृभाषा पोवारी भाषा को संरक्षन् अन संवर्धन लाई उनना, "मायबोली पोवारी बचाओ" अभियान की शुरुवात करकन विलुप्त होन की कगार परा उभी यन भाषा ला नवजीवन देनको भगीरथ काम करीन।                पंवार समाज की प्रतिष्ठित वार्षिक पत्रिका, "पंवार भारती" का सन २००१ को अंक मा ओनको येक लेख प्रकाशित भयो होतो। यन लेख मा उनना पोवारी बोली का जतन लाई समाजलक़ आह्वान करी होतिन। यन लेखमा स्व. पटले जी को द्वारा रचित ...