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Showing posts from September, 2022

क्षत्रिय पोवार(पंवार) समाज

                                                                                                          क्षत्रिय पोवार(पंवार) समाज मालवा राजपुताना के मूलनिवासी पंवार(पोवार) अठारहवी सदी की शुरुवात में, देवगढ़ राजा के द्वारा मुगलों के विरूद्ध संघर्ष हेतु आह्वान पर धारानगरी से नगरधन(रामटेक के पास) आये और अपनी वीरता से इस क्षेत्र मुगलों के विरुद्ध देवगढ़ राजा को विजय दिलाई। देवगढ़ के राजा ने मालवा के इन पंवारों को जागीर, किले और कृषि भूमि प्रदान की। इस समय पंवार अपने परिवार के साथ नगरधन और नागपुर सहित भंडारा जिले में आकर बस गये। मराठा शासन के समय भी पोवारों की राजकरण और सैन्य क्षेत्र में बड़ी भूमिका थी। कटक सहित कई अभियानों में इन्होंने मराठाओं का साथ दिया और जीत दर्ज की। इसी विजय के कारण पोवारों को वैन...

स्व. भोलाराम जी पारधी

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  स्व. भोलाराम जी पारधी स्व. भोलाराम जी पारधी, पूर्व सांसद और पंवार समाज से बालाघाट जिले से युगपुरुष जिन्हें समय के साथ धीरे धीरे सब भूल रहें थे, अब उनकी स्मृति में सभागार का नाम रखना एक छोटा सराहनीय कदम होगा। हालांकि उनके नाम पर ओवरब्रिज, चौराहे, रोड के नाम होने चाहिए पर ऐसा नही हुआ हैं। पोवार समाज के इस युगपुरुष को हमेशा याद रखना होगा और आने वाली पीढ़ीयों को उनसे प्रेरणा मिलते रहेगी। पंवार संदेश माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा पारधी परिवार का सम्मान आदरणीय स्वर्गीय भोलाराम पारधी पूर्व सांसद बालाघाट पंवार समाज के गौरव जिन्होंने लगभग 60 वर्ष पूर्व बालाघाट मंडी का उद्घाटन किए थे, उनकी स्मृति में मंडी के नए सभागार का नाम भोलाराम पारधी सभागार रख कर एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।

सामाजिक संगठनों के दायित्व

 सामाजिक संगठनों के दायित्व  सामाजिक संगठनों को समाज के उत्थान के लिए काम करना चाहिए। नियमों के अनुसार समयानुसार कार्यकारिणी में बदलाव भी जरुरी हैं और सबको यह भी ध्यान रखना चाहिए की सामाजिक संगठन कोई राजनीतिक संगठन नही हैं की इससे कुछ लाभ होगा। इधर तो सिर्फ अर्पण करना हैं और समाज के हर प्रकार उत्थान के लिए काम करना है। इसमें समाज के नाम, संस्कृति, भाषा और इतिहास के रक्षण के साथ समाज का समग्र विकास में सहयोग करना हैं। संगठनों को नियमावली के अनुरूप कार्य करना हैं, ये किसी की निजी जागीर नही की इसमें आ गये और कुछ भी काम न करें, या कुछ करें भी तो वो सर्वसमाज के हित में न हो। हमारे पुरखों ने बड़ी मेहनत से समाज को इस नये वैनगंगा क्षेत्र में बसाकार खूब तरक्की की और महान विरासत हमें दी, अब इसे आगे ले जाना हम सबकी जिम्मेदारी है। ऋषि बिसेन