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क्षत्रिय पोवार(पंवार) समाज के छत्तीस कुल

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                            क्षत्रिय पोवार(पंवार) समाज के छत्तीस कुल  १.अम्बुले(अमुले),      २.बघेले(बघेल),          ३.भगत,            ४.भैरम,     ५.भोएर,      ६.बिसेन,           ७.बोपचे,   ८.चौहान,          ९.चौधरी,      १०.डालिया,      ११.फ़रीदाले,      १२.गौतम,                 १३.हनवत,          १४.हरिनखेड़े,   १५.जैतवार,     १६.कटरे (गोंदिया-गोरेगांव क्षेत्र में देशमुख भी लिखते हैं),                  १७.कोल्हे,          १८.क्षीरसागर,   १९.पटले(वारासिवनी-कटंगी क्षेत्र में देशमुख भी लिखते हैं)          ...

क्षत्रिय पोवार(पंवार) समाज

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  क्षत्रिय पोवार(पंवार) समाज मालवा राजपुताना के मूलनिवासी पंवार(पोवार) अठारहवी सदी की शुरुवात में, देवगढ़ राजा के द्वारा मुगलों के विरूद्ध संघर्ष हेतु आह्वान पर धारानगरी से नगरधन(रामटेक के पास) आये और अपनी वीरता से इस क्षेत्र मुगलों के विरुद्ध देवगढ़ राजा को विजय दिलाई। देवगढ़ के राजा ने मालवा के इन पंवारों को जागीर, किले और कृषि भूमि प्रदान की। इस समय पंवार अपने परिवार के साथ नगरधन और नागपुर सहित भंडारा जिले में आकर बस गये। मराठा शासन के समय भी पोवारों की राजकरण और सैन्य क्षेत्र में बड़ी भूमिका थी। कटक सहित कई अभियानों में इन्होंने मराठाओं का साथ दिया और जीत दर्ज की। इसी विजय के कारण पोवारों को वैनगंगा क्षेत्र में बहुत सी भूमि प्राप्त हुयी और इनका विस्तार सिवनी से लेकर बालाघाट जिले लाँजी क्षेत्र तक हो गया। १७७५ तक अधिकांश पंवार नागपुर-नगरधन क्षेत्र से वैनगंगा क्षेत्र में जाकर स्थायी रूप से बस चुके थे ।ब्रिटिश काल में पंवारों को सतपुड़ा के उस पार बैहर-परसवाड़ा क्षेत्र में बसने के अवसर मिलें और १८७५ तक मालवा के पंवार, मध्यभारत के बालाघाट, सिवनी, भंडारा(गोंदिया शामिल) जिलों की कई तहसीलों म...

पोवार समाज की सामाजिक एकता

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                          ========================= पोवार समाज की सामाजिक एकता ========================= सबला जय राजा भोज पोवार समाज को स्वाभिमान अना सामाजिक एकता साती समाजिक समाजसेवी व नागपुर जिल्हा को समस्त पोवार समाज संगठन को पदाधिकारी सदस्य तसेच समस्त जन-मानसला हिरदीलाल ठाकरे को सहृदय नमन. जब् जब् भी आपलो समाज पर असा धक्कादायक प्रसंग आया सेती तब् तब् सिर्फ अना सिर्फ प्रयत्नवादी कर्तुत्वनिष्ठ ब्रम्हनिष्ठ निष्ठावान    सामाजिक समाजसेवी अना समाज संगठन का पदाधिकारी व सदस्य तसेच समस्त जन-मानस को सामाजिक एकता लक निवारण करनो मा आव् सेत. असोच एक धक्कादायक आघात दि ०३-०७-२०२२ रोज रविवारला पोवार समाज पर भयेव. मृतक स्वर्गीय चि. रोहन रामप्रसादजी ठाकरे वय वर्ष १७ जन्मस्थान बिनाकी पोस्ट तुमसर जिल्हा गोंदिया , कार्यारत घाटे दुग्ध मंदिर महल नागपुर , मृत्यू को कारण होटल मैनेजमेंट की लापरवाही जेको मा इलेक्ट्रिक फाल्ट को कारण करंट लगेव लक दर्दनाक मौत. येन् दर्दनाक मौत की खबर जब् आग बनकर पोवार समाज एकता मंच ला अना नागपुर को समस्त ...

निर्णय को अधिकार अना पोवार समाज

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 निर्णय को अधिकार अना पोवार समाज ********************************    अधिकार की अबोध दशा पर एक संक्षिप्त विवेचना.-     अधिकार को मूल मा अधिपत्य विराजमान रव्हसे, जेव सब निर्णय को कारक तत्व से.  यंहा निर्णय लेनो अना निर्णय निकलनो को फरक समजनो जरुरी से.     समाज पर अधिकार समाज को से ना की व्यक्तिविशेष या व्यक्तिसमूह को. जँहा समाज निर्णय लेसे वंहा अधिपत्य गौन रव्ह से अना सही निर्णय निकलसे.     समाज को हित मा उद्देश्य लेन को बेरा समाज को मूल को अना समाज की पीढ़ी दर पीढ़ी चल रही संस्कृति ला ध्यान मा ठेयस्यानी चर्चा करनो परा स्वाभाविक निर्णय निकलसे जेव समाज द्वारा समाज साती सार्थक सिद्ध होसे.     दुसरो पक्ष से निर्णय लेनो, जो की समाज को ऐतिहासिक तथ्य ला नजर अंदाज कर स्यानी स्वार्थ सिद्धि साती समाज को मूल अना संस्कृति ला गहान टाक स्यानी लेयो जासे. येलाच अधिकार की अबोध दशा कहयो जासे. पोवार समाज का शास्त्र अना शस्त्र पर  संक्षिप्त विवेचना-     अज अना भविष्य मा 36 कुल का पोवार1 साहित्यिक पर विशेष भार से, कारण ये साहित्य भविष्य...

हम पंवार क्षत्रिय वंशज राजा भोज के

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हम पंवार क्षत्रिय वंशज राजा भोज के हम पंवार क्षत्रिय वंशज है राजा भोज के। मानवता के रक्षक भी किस्से सुन लो ओज के।। दान, धर्म, दया, संस्कार का मोल हम जानते, स्वाभिमान को ही जीवन का हिस्सा मानते, सत्यवादी हम कलापुजारी झूठ को धिक्कारते। आडम्बर की जगह नहीं जो होते बस बोझ के।। गर्व हमें इस बात का नहीं कभी हम झुकते थे, वीर हमारे हरदम शेरों के जैसे लड़ते थे। फौलादी सीना हिम्मत औरर साहस के साथ में । आन बान और शान के किस्से मिलते हैं हर रोज के। मातृभूमि के रक्षक हम भारत मां के दुलारे, संकट उस पर जो आये जान भी अपनी वारे, पुरखों से जो सीख मिली है वही हमारी पूंजी है। आज युवा आदर्शों पे बढ़ते नवयुग नव खोज के।। प्रेम और वात्सल्य का अब वो अवलम्ब कहाँ, भागीरथ के जैसा होता था वो तप बल कहाँ । आओ मिलकर हम सब शपथ उठाते है । शांतिदूत बन एक्य भाव से गुण लेकर के सरोज के।। अलका चौधरी, बालाघाट