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पोवार(३६ कुर पंवार) समाज मा बिहया का रीति-रिवाज अना नियम

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  पोवार(३६ कुर पंवार) समाज मा बिहया का रीति-रिवाज अना नियम   १). हमारो समाज मा पुरातन् काल मा छत्तीस कुर होता पर वैनगंगा क्षेत्र मा एकतीस कुर की बसाहट भई अना आता इनको बीचमा को पारिवारिक संबद्ध मा होनेवाला बिहया सजातीय बिहया ला समाज मा मान्यता देसेती। २). आमरो क्षत्रिय कुर पोवार (छत्तीस कुर पंवार) समाज मा विवाह योग्य कुर/कुल १. अम्बुले (अमुले) , २. बघेले (बघेल) , ३. भगत (भक्तवर्ती ) ,   ४. भैरम ,   ५. भोएर , ६. बिसेन ,   ७. बोपचे , ८.चौहान , ९.चौधरी , १०. डाला , ११. तुरकर , १२. गौतम , १३. हनवत , १४. हरिनखेड़े , १५. जैतवार , १६. कटरे १७. कोल्हे , १८. क्षीरसागर , १९. पटले २०. परिहार , २१. पारधी , २२. पुण्ड , २३. राहंगडाले , २४. येड़े , २५. रिनायत , २६. राणा (राणे) २७. शरणागत , २८. सहारे , २९. सोनवाने , ३०. ठाकरे (ठाकुर) , ३१. टेम्भरे। रावत , फरीदाले , रणमत , रनदीवा अना राजहंस कुल ला मिलायकन पोवार समाज का ३६ कुर/कुल होन का इतिहास मा उल्लेख से पर आपरो क्षेत्रमा ये कुल प्रायः लुप्त भय गया सेती। ३). समान कुल मा बिया मान्य नहाय अना यव घोर पाप की श्रेणी मा...

पोवार(36 कुरी पंवार) समाज का मध्यभारत/वैनगंगा क्षेत्र में आकर बसने का इतिहास

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        पोवार(36 कुरी पंवार) समाज का मध्यभारत/वैनगंगा क्षेत्र में आकर बसने का इतिहास आओ बचाये अपनी संस्कृति और गौरवशाली इतिहास को, और दे सच्ची श्रद्धांजलि अपने पूर्वजों को सन् 1700 क़े आसपास हमारे पुरखों ने नगरधन(रामटेक क़े समीप) और वैनगंगा क्षेत्र में आकर, 36 क्षत्रिय कुलों क़े रूप में संगठित होकर नये युग की शुरुवात की। ********************** राजा भोज धर्मपरायण राजा थे और उनके शासन का आधार सनातनी धर्म था। उनके युद्ध भी धर्मयुद्ध होते थे और उनकी कोई स्थायी सेना न होकर, धर्म के लिए लड़ने वाले योद्धाओं का समूह था। यही वजह थी की उनकी, हर युद्ध में विजय होती थी। लेकिन चौदहवी सदी के शुरुवात में मालवा पर मुस्लिमों के आधिपत्य के बाद उनके वंशजों और सहयोगियों को कठिन वक्त से गुजरना पढ़ा। मालवा पर मुस्लिमों के आधिपत्य के बाद उनके वंशजों और नातेदारों ने सैन्य समूह के रूप में दुश्मनों के विरूद्ध संघर्षों में अनेक राजाओं का सहयोग किया। कूछ अन्य दूसरे क्षेत्रों में जाकर भी बस गये। उनका एक बड़ा सैन्य जत्था अठारवी सदी में देवगढ़ राजा के अनुरोध पर नगरधन(रामटेक के पास) आया था जो बाद में...