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निर्णय को अधिकार अना पोवार समाज

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 निर्णय को अधिकार अना पोवार समाज ********************************    अधिकार की अबोध दशा पर एक संक्षिप्त विवेचना.-     अधिकार को मूल मा अधिपत्य विराजमान रव्हसे, जेव सब निर्णय को कारक तत्व से.  यंहा निर्णय लेनो अना निर्णय निकलनो को फरक समजनो जरुरी से.     समाज पर अधिकार समाज को से ना की व्यक्तिविशेष या व्यक्तिसमूह को. जँहा समाज निर्णय लेसे वंहा अधिपत्य गौन रव्ह से अना सही निर्णय निकलसे.     समाज को हित मा उद्देश्य लेन को बेरा समाज को मूल को अना समाज की पीढ़ी दर पीढ़ी चल रही संस्कृति ला ध्यान मा ठेयस्यानी चर्चा करनो परा स्वाभाविक निर्णय निकलसे जेव समाज द्वारा समाज साती सार्थक सिद्ध होसे.     दुसरो पक्ष से निर्णय लेनो, जो की समाज को ऐतिहासिक तथ्य ला नजर अंदाज कर स्यानी स्वार्थ सिद्धि साती समाज को मूल अना संस्कृति ला गहान टाक स्यानी लेयो जासे. येलाच अधिकार की अबोध दशा कहयो जासे. पोवार समाज का शास्त्र अना शस्त्र पर  संक्षिप्त विवेचना-     अज अना भविष्य मा 36 कुल का पोवार1 साहित्यिक पर विशेष भार से, कारण ये साहित्य भविष्य...

हम पंवार क्षत्रिय वंशज राजा भोज के

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हम पंवार क्षत्रिय वंशज राजा भोज के हम पंवार क्षत्रिय वंशज है राजा भोज के। मानवता के रक्षक भी किस्से सुन लो ओज के।। दान, धर्म, दया, संस्कार का मोल हम जानते, स्वाभिमान को ही जीवन का हिस्सा मानते, सत्यवादी हम कलापुजारी झूठ को धिक्कारते। आडम्बर की जगह नहीं जो होते बस बोझ के।। गर्व हमें इस बात का नहीं कभी हम झुकते थे, वीर हमारे हरदम शेरों के जैसे लड़ते थे। फौलादी सीना हिम्मत औरर साहस के साथ में । आन बान और शान के किस्से मिलते हैं हर रोज के। मातृभूमि के रक्षक हम भारत मां के दुलारे, संकट उस पर जो आये जान भी अपनी वारे, पुरखों से जो सीख मिली है वही हमारी पूंजी है। आज युवा आदर्शों पे बढ़ते नवयुग नव खोज के।। प्रेम और वात्सल्य का अब वो अवलम्ब कहाँ, भागीरथ के जैसा होता था वो तप बल कहाँ । आओ मिलकर हम सब शपथ उठाते है । शांतिदूत बन एक्य भाव से गुण लेकर के सरोज के।। अलका चौधरी, बालाघाट